लेखनी प्रतियोगिता -फोटोग्राफी
फोटोग्राफी के बारे में जानकारी
चित्रों का दौर शुरू से रहा है ।पहले दीवारों पर, कागजों पर हाथों से रंगों से चित्र बनाने की कला थी लेकिन समय के साथ सभ्यता में बदलाव आया।
तेल चित्र और रंगो वाली पेंटिंग को छोड़कर विज्ञान वादी परंपरा अपना सिर उठाया और फोटो खींचने का रिवाज प्रचलन में आया।
फोटोग्राफी के शब्द यह शब्द बहुत ही पुराना है ।इसकी शुरुआत 9 जनवरी 1839 ई में फ्रेंच एकेडमी ऑफ़ साइंस मे ं शुरूआत किया था। इससे डोगेरो टाइप कहा जाता था।
दो फ्रेंच साइंटिस्ट जोसेफ नाइसफोर और लुईस डेरल ने इस प्रक्रिया को विकसित कर एक अलग ही तरह से फोटो खींचने की परंपरा का आविष्कार किया।
19 अगस्त 1839 ई को फोटोग्राफी दिवस के रूप में मनाया जाता है ।इसी दिन फ्रेंच सरकार ने इस प्रक्रिया को फ्री फॉर ऑल किया था ।
दुनिया की पहली तस्वीर 18 26 ईस्वी में ली गई थी ।या डॉग रो टाइप प्रक्रिया थी ।
इसमें एक तस्वीर लेने में 8 घंटे लगे थे फिर धीरे-धीरे इस प्रक्रिया में बदलाव लाया गया।
इसे लुईस डेरोल ने अपने खिड़की से खींचा था।
भारत में फोटो खींचने की परंपरा का विकास 16वीं सदी से ही माना जाता है।
भारत के पहले फोटोग्राफर कोलकाता के जोशीय रोवे को माना जाता है।ये सर्वेक्षक थे।
समय के साथ और विज्ञान की प्रगति के साथ कैमरे में भी बदलाव होते चले गए।
अब कैमरे ऐसे होते हैंजो रियलिटी से ज्यादा सुंदर चित्र खींच ता है।
आप सभी को वर्ल्ड फोटोग्राफी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
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